Wednesday, 24 September 2014

नवरात्र ----आध्यात्मिक और शारीरिक द्रष्टि से महत्वपूर्ण

नवरात्र का पावन पर्व हमारे हिन्दुस्तान में धूम धाम से मनाया जाता है,जो हमे आनन्द,और अध्यात्म की अनुभूति करवाता है,  आनन्द की अवस्था में शरीर में  तनाव पैदा करने वाले हार्मोन्स समाप्त हो जाते है,और जो हार्मोन्स उत्सर्जित होते है वे हमारी सेहत के लिये अत्यंत लाभदायक होते है,ये हमे रोगो से तो बचाते ही है रोगो को भी  है,वर्ष के दोनों प्रमुख नवरात्रे चैत्रीय शारदीय ऋतू परिवर्तन लेकर आते है,इनके अलावा दो गुप्त नवरात्रे भी आते है,मौसम परिवर्तन के साथ बाहरी वातावरण में भी बदलाव आता है,उसी प्रकार हमारे भीतर भी बदलाव आना चाहिये,भीतरी बदलावों से हमारे से हमारे मनोभावों में सही बदलाव हो जाता हैतो वह विषम से विषम परिस्थिति में भी आसानी से अपना अस्स्तित्व बनाये रखने में कामयाब हो जाते है,नवरात्रों का ये आयोजन ये  अवसर   प्रधान करता है हम ऋतू परिवर्तन के साथ हम अपने अंदर भी परिवर्तन लाये,नवरात्री में किये जाने वाले विभिन्न अनुष्ठान,व्रत,पूजा पाठ,साधना तथा आराधना,जहा हमारे शरीर भावो की शुद्धि करते है वही पर्यावरण का संगरक्षण भी होता है,व्रत शारीरिक शुद्धि का पारम्परिक तरीका है,नवरात्र का आयोजन शुक्ल पक्ष में किया जाता है,शुक्ल पक्ष प्रकाश का प्रतिक है,प्रकाश अर्थात अंधेरे से उजाले की और असत्य से सत्य की और,अपने विचारो को सकारात्मक बनाये रखने के लिए माँ दुर्गा के जिन नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है वे रूप असल में मनुष्य की विभिन्न मनोदशाओं के परिष्कार से जुडी है,दुर्गा सप्तसती  में जिन  राक्षसो का संहार के विषय में जिन रूपों का जिक्र आता है वे असल में हमारी नकारात्मक ऊर्जा का प्रतिक है,विज्ञानं भी व्रत का उलेख करते है,व्रत रखने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है,शरीर से अनेक व्याधि दूर होती है ,मन विचलित नहीं होता हैमन में शुद्ध विचारो का आदान प्रदान होता है,इसलिए आप भी इन नवरात्रों में माँ की भक्ति पूर्ण निष्ठां के साथ करे, नौ दिनों में नौ देवियो की पूजा की जाती है,जिसके निम्न नाम से माँ को जाना जाता है। ये माँ दुर्गा के नौ रूप है,
 



  
१ -- शैलपुत्री 

२ -- ब्रह्मचारिणी 

३ --चंद्रघटा 

४ -- कुष्मांडा 

५ -- स्कंदमाता 

६ -- कात्यायनी 

७ --कालरात्रि 

८ -- महागौरी 

९ -- सिद्धिदात्री 

ये माँ के नौ रूप है जिसका वर्णन दुर्गासप्सती में किया गया है,आप भी नवरात्र में माँ की भक्ति अनुष्ठान आराधना करके अपने जीवन और शरीर को पवित्र बना सकते है,क्योकि इस काकलयुग  में माँ दुर्गा ही है जिसके व्रत ,अनुष्ठान ,भक्ति,जप तप करके हम अपने जीवन के अनेक कष्टो  से मुक्ति पा सकते, जीवन को अधाय्त्मिक रूप में ढल सकते है, 

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8 comments:

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